हत्था जोड़ी
हत्था जोड़ी (Hatha Jodi) तंत्र शास्त्र और ज्योतिष में एक अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली जड़ी मानी जाती है। यह वास्तव में 'बिरवा' नामक पौधे की जड़ होती है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के अमरकंटक और घने जंगलों में पाई जाती है।
इसका आकार मानव हाथ की दो जुड़ी हुई हथेलियों जैसा होता है, जैसे कोई 'नमस्ते' की मुद्रा में हाथ जोड़े खड़ा हो। इसी आकृति के कारण इसे 'हत्था जोड़ी' कहा जाता है।
तंत्र शास्त्र में इसे साक्षात चामुंडा देवी का स्वरूप माना गया है। यह वशीकरण, शत्रु बाधा निवारण और धन प्राप्ति के लिए अचूक मानी जाती है।
मंत्र सिद्ध हत्था जोड़ी के मुख्य उपयोग :-
1. धन और समृद्धि: इसे तिजोरी या गल्ले में रखने से व्यापार में वृद्धि होती है और दरिद्रता दूर होती है।
2. वशीकरण और प्रभाव: इसे सिद्ध करके पास रखने से व्यक्ति का प्रभाव बढ़ता है। लोग उसकी बातों से सम्मोहित होते हैं।
3. शत्रु विजय: मुकदमे, कोर्टकचहरी या किसी भी प्रकार के विवाद में विजय प्राप्त करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
4. सुरक्षा: यह घर को नकारात्मक ऊर्जा, तंत्रमंत्र और बुरी नजर से बचाती है।
अगर आप हत्था जोड़ी लेना चाहें तो संपर्क कर सकते हैं .
पूर्ण तांत्रिक लाभ के लिए तीन तांत्रिक समग्रियों का सेट घर मे रखना लाभप्रद माना गया है ।
ये हैं :-
हत्था जोड़ी: लक्ष्मी और सौभाग्य के लिए।
सियार सिंगी: सुरक्षा और विजय के लिए।
बिल्ली की जेर : आकस्मिक धन लाभ और रुके हुए कार्यों के लिए।
अगर ये तीनों एक साथ रखकर चामुंडा मंत्र या नवार्ण मंत्र का जाप नित्य किया जाये तो इनका प्रभाव और बढ़ जाता है ।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें